राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा रही बसपा और बीटीपी, कई निर्दलीय विधायक भी दिखा रहे आंखें

जयपुर। राज्यसभा चुनाव के रण में राजस्थान कांग्रेस के लिये तीसरी सीट को जीतने की चुनौतियां दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कांग्रेस एक तरफ राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को जीतने के लिए निर्दलीयों और बीएसपी के विधायकों को अपने पाले में रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है। दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर कांग्रेस के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी है। बसपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को पत्र लिखकर मांग की है कि बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस में शामिल होने वाले 6 विधायकों को राज्यसभा चुनाव में मतदान करने से रोकें। वहीं बीटीपी विधायकों ने भी कांग्रेस की बीपी को बढ़ा रखा है।

भगवान सिंह बाबा ने लिखा कि बीएसपी राज्यसभा चुनाव में किसी भी दल या निर्दलीय को समर्थन नहीं करेगी। इन छह विधायकों की सदस्यता का मसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर कभी भी फैसला आ सकता है। ऐसी सूरत में इन विधायकों को मतदान की इजाजत न दें। बीएसपी का आरोप है कि ये विधायक असंवैधानिक तरीके से कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

2019 में कांग्रेस में शामिल हुये थे बीएसपी विधायक

आपको बता दें कि 2019 में बीएसपी के टिकट पर जीते छह विधायक राजस्थान में एक साथ कांग्रेस में शामिल हो गये थे। इनमें विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा, जोगेंद्र सिंह अवाना, संदीप यादव, दीपचंद खेरिया, वाजिब अली और लाखन सिंह मीणा शामिल हैं। बीएसपी ने इस मामले को कोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी याचिका पर मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के विलय को मान्यता दे दी थी।

बीएसपी के 2 विधायक जाहिर कर चुके हैं नाराजगी

इनमें से कुछ विधायक सरकार से खफा भी चल रहे हैं। बसपा से कांग्रेस में आये विधायकों में से वाजिब अली और संदीप यादव नाराजगी के चलते जयपुर में चल रहे कांग्रेस के एक्शन टेकन कैंप में भी नहीं पहुंचे हैं। वाजिब अली तो अपनी नाराजगी का इजहार भी कर चुके हैं। कांग्रेस की मुश्किल सिर्फ बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए ये विधायक ही नहीं बल्कि निर्दलीय विधायक भी हैं। निर्दलीय विधायक रमिला खड़िया भी कांग्रेस के कैंप में नहीं पहुंची हैं।

बीटीपी विधायकों ने साफ नहीं किया अपना स्डैंट

दूसरी तरफ बीटीपी के दो विधायक भी अभी तक कांग्रेस के कैंप में नहीं आए हैं। अब गहलोत सरकार की कोशिश है कि उदयपुर में की जा रही बाड़ाबंदी में इन सभी नाराज विधायकों को किसी तरीके से लाया जाए। इस बीच बीटीपी के अध्यक्ष वेलाराम गोदारा ने एक बयान जारी कर कहा है कि राज्यसभा चुनाव में राजस्थान में उनकी पार्टी किसी भी दल को समर्थन नहीं देगी। लेकिन बीटीपी के दोनों विधायकों ने अभी तक अपना स्टैंड साफ नहीं किया है।

निर्दलीय विधायकों की बाड़ाबंदी हुई शुरू

इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि दोनों विधायक पार्टी का आदेश मानेंगे या फिर अपना फैसला लेंगे। इस बीच में कुछ निर्दलीय विधायकों को पुलिस की मदद से बाड़ीबंदी में लाने की शुरुआत कर दी गई है। किशनगढ़ से विधायक सुरेश टाक के घर पर कल शाम को पुलिस तैनात की गई थी। फिर रात को निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर के साथ टाक को उदयपुर रवाना किया गया। टाक सुभाषचन्द्र के करीबी हैं।

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